कौन कहता है कि हम एक ही मरते है।
अपने को खोकर . देखो हम कितना तड़पते है ॥
विरह की अग्नि मे जलते हैं और आहे भरते है ।
खामोश हर दर्द को सह क� read more >>
कलम में इतनी धार दे !
ऐ माँ शारदे,ऐ माँ शारदे !!
कलम से निकले अलफाज !
वक्त ए हकीकत हो जाए !!
बात में हो वजन इतना !
हर शब्द किताब हो जाए !!
कलम मे� read more >>
आँखों का है खेल निराला |
सुन लो भैया सुन लो लाला ||
आँखों का काजल लुट जाये |
तुमको पता नहीं चल पाये ||
चोट लगे तो आँखे रोतीं |
नींद आये तो आँख read more >>