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प्रीति _ प्रीति
प्रीति_प्रीति प्रीति है इस जहाँ से, प्रेम और श्रधा भी है। निर्मल हृदय मचल_ मचल कह रही है, थोड़ा और जीने दे मुझे। बहुमूल्य जीवन �
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कदर
चाल तेरे हर खेल की मालूम है। समझ, बस तेरी थोड़ी सी कदर है दिल में इस वजह से हमने तुझे बेपर्दा नहीं किया।
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हम बंदे एक ख़ुदा के हैं
जब गाता हूं अपना गीत, तुझे क्यों लगे अपना गीत, हम इंसानों की यही फ़ितरत है... हम बंदे एक ख़ुदा के हैं... -मोती
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प्रेम बांटते फिरो
हर किसी का दिल मैं चुराता हूं, हर किसी को अपना बनाता हूं, बंदा फ़कीर प्रेम बांटता फिरता हूं... दिल-ए-भर लो प्रेम बांटते फिरो... -मोती
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हम प्रेम अमर कर जाएंगे
हम संग-संग जिए जाएंगे, महोब्बत में भीग जाएंगे, ये सबब दुनिया को दिए जाएंगे... हम प्रेम अमर कर जाएंगे... -मोती
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संसार की दुश्चिंताओं को
संसार की दुश्चिंताओं को क्यों तोड़ रही आशाओं को खुल कर जीने का दंभ है मेरा फिर अकुलाहट क्यों बाधाओं को। ये समर मेरा अपना है रूक कर क�
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ये हर सांस मेरी महक रही
ये हर सांस मेरी महक रही, एहसास में मैं हूं बहक रही, पिया दीदार को यूं तरस रही... तुझे दिल में मैं पूजती रही... -मोती
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भ्रम -भ्रमण
यह दुनिया, है भ्रम का टपरा। वरना मनुज, है मिट्टी का कमरा। भ्रम ही तो है, जिस पर टिकी है धरा। भ्रम का ही खेल है, पर-परा। तेरा, मेरा, सबक�
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कुछ तो ऐसा करो
मुझे...'मैं' और...तुमसे..'तुम'..खो जाओ..ना कुछ तो ऐसा करो...और..'हम'..हो जाओ..ना..!!
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अपना पराया
किसको अपना समझे? अपने को या पराए को? किसको पराया समझे? पराए को या अपने को?
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उम्मीद
किसी से बहुत ही ज्यादा उम्मीद की थी; मगर उसने सिखा दिया कि, उम्मीद किसी से कभी करनी ही नहीं चाहिए। समझी?
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Sukun
Mere jivan me for se eak tufan aya Chhin kar khusiyo ko dukhe ka bhandar laya Kya kusur tha mera jo dero musibte eak sath laya Sok the mere unhe pura karne ka junun tha Khusi ya thi sari jivan me sukun tha
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