संदीप कुमार सिंह 04 Jul 2024 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है. जिसे पढ़कर पाठक गण अवश्य लाभान्वित होंगें. 43255 0 Hindi :: हिंदी
प्रीति_प्रीति प्रीति है इस जहाँ से, प्रेम और श्रधा भी है। निर्मल हृदय मचल_ मचल कह रही है, थोड़ा और जीने दे मुझे। बहुमूल्य जीवन साथ में सुन्दर चरित्र, भारतवर्ष का इतिहास गौरवान्वित करने दे मुझे। चारों और फैला गहरा अंधविश्वास और लज्जा जनक धारणाओं को, दूर करने दे मुझे। थोड़ा और जीने दे मुझे। कर्त्तव्य है हमसबों का, सुसज्जित और सम्मानित, राष्ट्र निर्माण का। शत्रुओं और दुष्ट निर्लज्जों को, कठोर और प्रचंड दण्ड देने का। थोड़ा और जीने दे मुझे। इरादा मजबूत और मुहब्बत का पैगाम, स्वाभिमान और प्रगति का सैलाब, फैलाने दे मुझे। थोड़ा और जीने दे मुझे। यथायोग्य व्यवहार और सुरक्षित जीवन, सुन्दर देश अपना। इसमें उत्साह भरे स्वर, भरने दे मुझे। थोड़ा और जीने दे मुझे। कठिनाईयों, बाधाओं और प्रलोभनों से, लड़ने दे मुझे। दृढ़संकल्प और आत्मबल, भरने दे मुझे। थोड़ा और जीने दे मुझे। देश के कोने _ कोने मे, सभ्य और भद्र जन_जन में, स्वच्छ भावना फैलाने दे मुझे। थोड़ा और जीने दे मुझे। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....