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प्रिय पाठकों, इस होली पर ढूंढ रही हू कुछ खोए हुए मानवता के रंग जो वक्त के साथ साथ इस आधुनिकता में कही खो गए हैं। होली के चमकदार, रंग बिरंग read more >>
कहते हैं आग सबकुछ जला देती है कुछ पुरानी तमंन्नाएँ हैं मेरे पास read more >>
कास कोई मेरे सपनों में भी आती और अपने रूप यौवन से तरसाती। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार read more >>
तुम मेरी जिन्दगी बन गई हो ऐसा हुआ कमाल, तब से अनवरत मैं कर रहा हूं मस्त-मस्त धमाल। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्त� read more >>
दुनियाँ में तो ग़मों का महासागर है, पर हम भी तो हर गुण से आगर है। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार read more >>
कयामत की तुम बेमिसाल सूरत हो, आब की तुम अद्वितीय मूरत हो। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:- समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार read more >>
मेरे लिए तुम कुछ भी कर लो ओ मेरे यार, दुनिया वालों को हैरत में डाल दो ओ मेरे हार। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीप� read more >>
आज इन्सानियत को लगता है किसी ने चुरा लिया है। आज अपना ही अपना बनकर सिर्फ धोखा दिया है। चिन्ता इसका हल नहीं वक्त के साथ सम्हलना पड़ेग� read more >>
प्यार की तुम जीती - जागती देवी हो हृदय की तुम जैसे सूरज की किरण हो । (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहा read more >>
तूँ हुस्न के रंगों से लिखी हुई ग़ज़ल है, प्यार के दरिया में खिलता हुआ कमल है। read more >>
मैं उस दौर में हूँ जहां, सबके शामियाने हैं । हर जगह अपने लिए, सबके पास बहाने हैं ।। एक मेरा ही घरौंदा है, जहाँ दीपक जलता है और सभी को तो, ए� read more >>
तुम इरादे बना लो, तो जोड़ सकती हो मुझे। तुम रास्ता बना लो, तो मोड़ सकती हो मुझे।। मैंने कुछ इस कदर कर दिया है, खुद को तेरे हवाले । कि म� read more >>
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