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वो परदेसिया- तू कहां इस देश में, कोई न तेरा- तू कहां इस देश में, आया कहां से जाना- कहां वो परदेसिया तू कहां,, जीवन- दिन चार यहां तू परदे� read more >>
न जाने राही- कितने इस राह पर... एक कहानी- बन जाते इस राह पर... ज़िंदगी सुलझता- नहीं उलझता जाता है यहां... भटकता- जीवन गुज़र जाता ए-कहां?... -� read more >>
अब, अंदाज भी बिक ने लगे है । बेड़े, बिन्दास अन्दाज़, मे, हुआ, ये चमत्कार , तब । जब, खुदगर्जो की भीड़ मे उसने , सीने से लगाया । वो ,परवदी read more >>
ना घबराना आई मुश्किलों को डट के करना सामना इन मुश्किलों से एक न एक दिन तो मरना ही है। क्या घबराना इस मौत से है ऊपर बैठा भगवान उसको पता read more >>
आज की दुनियाँ में धोखे बाज कम नहीं, बाहर से दिखे मासूम अंदर वह विष रखे। बातें प्यारी-प्यारी करें और कर लेता वश में, फिर कर देता है अपन� read more >>
"जिंदगी के इस राह में- युगों-युगों से चले आ रहे हैं"! "ना जाने- कितने ही मुसाफिर, यहां भटकते आ रहे हैं"! "देखो कोई- ए-बिरला ही पहुंच, पाता अ read more >>
ये, खावाईशो कि आंघीयाँ ले उडी़ बादशाहों की नींद, और परिन्दों के घर........ दर-दर भटक रहै है। आज भी मुहोबतों के वाशिन्दे , के, ऊमीद, मे उजड़ ग� read more >>
वक्त, जो बिता इश्क का अन्दाज़ बदला । आज - कल कहाँ ! वो ,तेरे नाम के लिफाफे ,आते है। read more >>
Once upon a time, in a quaint village nestled between rolling hills and meandering streams, lived two siblings, Anika and Aarav. They shared a bond that was as strong as the ancient banyan tree standing tall in the village square. Every year, on the auspicious day of Bhaiya Dooj, Anika would eagerly await her brother's return from the city. Aara read more >>
खुशी पर्व नवरात्रि की,पावन आया वक्त। माता के नौ रूप से,लहर चले है रक्त।। प्रथम शैल पुत्री तुझे,करूं नमन मैं खास। पूरे कर अरमान सब,और ब� read more >>
दिप्त्त दीप दान का, अभिमान नम करी! स्वेच्छ, ऊज्वला करी, चिरागों कि रौशनी!! ‌‌‌‌ विकाश का पवन बहे, अवकाश वक्त से! दिप्त्� read more >>
बहूत जरूरी है, के आप किसी आइनों से झूठ मत बोलिऐ। क्योकि ,सच, उसे पता है। उसने, आप को , पहले, अपने आप मे उतारा है । read more >>
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