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खुशी पर्व नवरात्रि की पावन आया वक्त-माता के नौ रूप से लहर चले है रक्त

संदीप कुमार सिंह 14 Nov 2023 कविताएँ धार्मिक मेरी यह कविता समाज हित मे है।जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगे। 30117 0 Hindi :: हिंदी

खुशी पर्व नवरात्रि की,पावन आया वक्त।
माता के नौ रूप से,लहर चले है रक्त।।

प्रथम शैल पुत्री तुझे,करूं नमन मैं खास।
पूरे कर अरमान सब,और बढ़ा दे आस।।

बैल सवारी तूं करे,रखती हाथ त्रिशूल।
दुष्टों का संहार कर,करती जग अनुकूल।।

अदभुत रूप द्वितीय है, ब्रह्मचारणी नाम।
सफल करें सब आरजू,दे दे सही मुकाम।।

मातु आगमन से धरा,चमक रही है खूब।
घर घर में उत्साह है,तुझ में ही सब डूब।।

कहने को सब कह रहे,आते सभी न काम।
खुद के चलें विवेक से,जीवन हो गुलफाम।।

कहने को सब कह रहे,लोगों का दस्तूर।
रहें दशा को देखते,खाएं तभी अँगूर।।

गलती तो होती रहे,करता रहूं सुधार।
कहने को सब कह रहे,करते ज्ञान फुहार।।

कहने को सब कह रहे,व्यर्थ करे उपकार।
हसरत की जब हो लड़ी,निश्चित मिलता प्यार।।

कहने को सब कह रहे,लगे नहीं कुछ दाम।
मुफ्त ज्ञान से तो यहां,चलता कभी न काम।।

दुख का कारण खोजिए,सदा रहें तब मस्त।
बुरे चीज से दूर रह, होगा कभी न अस्त।।

दुख का कारण खोजिए,मंथन कर लें खास।
रखें संतुलन जो सदा,खुशियाँ उनके पास।।

दुख का कारण खोजिए,पूछें खुद से आप।
सीमा में जो जन रहे,नहीं मिले संताप।।

दुख का कारण खोजिए,एक बात अति सत्य।
जीवन तो संग्राम है,रखें पास में तथ्य।।

दुख का कारण खोजिए,शिक्षा करें प्रसार।
शिक्षित रहे समाज तो,घर घर हो गुलजार।।

अपनी अपनी भूमिका,अपनी अपनी सोच।
जिनकी जैसी सोच हो,वैसा ही उल्लोच।।

सावन का बादल लगे,सबको ही अति खास।
अपनी अपनी भूमिका,से भरिए उल्लास।।

अपनी अपनी भूमिका,करें भव्य जीवंत।
जनता हो आसक्त तब,देंगे दुआ अनंत।।

सूरज खास प्रकाश से,करते सबको तृप्त।
अपनी अपनी भूमिका,में जमकर हों लिप्त।।

अपनी अपनी भूमिका,से ही बनूं विशेष।
मोहन वाला तब यहां,बन जाए अरु भेष।।

वही दे रहे चोट अब,जो कल थे बहु खास।
आज लगे जलने बड़ा,और करे उपहास।।

अपना बनकर साथ है, मन में रखता खोट।
बातें करता है मधुर,वही दे रहे चोट।।

बिछड़ गया है यार अब,बनता है वह तेज।
वही दे रहा चोट अब,देता है अंगेज।।

जो थे खूब करीब में,पाए सबका वोट।
मिले जीत के बाद में, वही दे रहे चोट।।

वही दे रहे चोट पर,रखे हुए है मोट।
नहीं होश खुद का रखे,व्यर्थ करे वह नोट।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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