हो .....याद आवेला आ, हो... याद आवेला आ, हो..….. याद आवेला आ हो......
घर वा दूअरबा....गउआ बगीचा.......खेत खलियानवा.....
याद आवेला हो......याद आवेला आ
याद आवेला ह read more >>
मेरा साथी पेड़ - एक जीवंत संस्मरण
हमारे घर के छोटे से बगीचे में एक बड़ा, हरा-भरा आम का पेड़ था। उसकी जड़ें मानो घर की नींव से जुड़ी थीं। ब� read more >>
आज का युग बदला है, सोच नई हो गई,
पर मेहनत की राह अभी भी वही पुरानी है भाई।
सपने तो सब देखते हैं आसमान जितने ऊँचे,
पर बिना पसीना बहाए मिलते read more >>