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उस रात अस्पताल की दीवारें भी जैसे चुप थीं। हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। बारह साल का अयान अपनी माँ का हाथ पकड़े ऑपरेशन थिएटर के बाहर बैठ� read more >>
मुसाफिर को नई राहों का मंज़र मिल गया है, मेहनत का उसे आज समंदर मिल गया है। ​कल तक जो था खुद इक अदना सा तालिब-ए-इल्म, आज उसे उस्तादों का व� read more >>
मिले हैं जख्म तो मरहम लगाना सीख लेंगे हम, हवाओं के रुख़ को खुद ही मोड़ना सीख लेंगे हम। ​अभी सूरज ढला है, रात की मुट्ठी में अंधेरा है, सह� read more >>
ये जो चेहरे पे चमक है, ये सदा रहने की नहीं, वक्त की लहर है साहब, ये रुकने की नहीं। ​कांच के घर में रहकर पत्थर से मोहब्बत कैसी? ये जो मिट्ट� read more >>
चाय और पीयू ऐसा दौर आया, शायर को जगाने फिर कोई शायर आया।। read more >>
एक था दीया, एक बाती। जीवन रोशन करते, बन जीवन साथी। दीये हिये प्रेम से, लवलीन बाती। हवा हलराती बातें करती, आती-जाती। दीया हिये से उ� read more >>
मेरा लिखा हर अल्फाज तेरा मुकद्दर बन गया, अब इस गालिब का हर ख्याल मेरी मन्नत का समंदर बन गया ।। read more >>
हर बार उम्मीद टूटी , ऐसी कोई जंजीर फिर रूठी ।। read more >>
दुनिया को फतह करने का अरमान न पाल तू, पहले अपने मन के अंधेरों को ढाल तू। ​बाहर तो मिल जाएँगे लश्कर तुझे कई, अंदर जो चल रही है, वो जंग संभ� read more >>
ख्वाब का समंदर फिर टूटा है, ऐसा ही शीशा फिर एक बार छूटा है ।। read more >>
भीड़ की आवाजों में, अपना राग कहीं खो न देना, दुनिया के तराजू में, खुद के ख्वाबों को मत तोलना। कोई कहेगा पत्थर तुमको, कोई कहेगा कांच यहाँ, � read more >>
लिखने बैठूँ तो ज़माने भर के मंज़र कम हैं, मेरी आँखों में जो छुपे हैं, वो समंदर कम हैं। ​जिन्हें डर है कि बयाँ करने से शब्द घट जाएँगे, वो read more >>
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