आज के युग का अजब नज़ारा,
सबको मंज़िल चाहिए दोपहरा।
ना ठहराव, ना कोई सब्र अब,
हर दिल में बस जल्दी का सहरा।
कदम-कदम पर जो ठोकर खाए,
वो हार � read more >>
कविता: 🏅 “खेल का दीप जलाओ” 🏆
मैदान बुला रहा है तुमको, आओ खेल दिखाओ,
दिल में जोश, आँखों में सपना - आगे कदम बढ़ाओ।
पसीने की हर बूँद यहाँ, मे� read more >>
मेहनत न करूं ,
फिर तो पसीना नहीं आता ।
बिना पसीने के हवा में बैठ सकूं ।
आखिर कब- तक यूंही बैठ सकूंगा।
मुझे ही नहीं, कोई दूसरे भी होंगे।
ज� read more >>