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कलम चाहे हज़ार हों, पर बात क्या होगी? जो शब्द ही न पास हों, तो शुरुआत क्या होगी? सजी हों अलमारियाँ, पर रूह ही न हो, तो कागज़ों के साथ फिर, मुला read more >>
पत्थर की मूरत को छप्पन भोग लगाते हो, सोने के गुंबद पर तुम चांदी चढ़ाते हो। वो तो जगत का स्वामी है, उसे क्या कमी है? असली जरूरत तो यहाँ, आँ� read more >>
क्या लिखूँ , तुझ पर ऐ जिन्दगी ! तुने बडा सताया है , हर बार मेरे हिस्से का गम, मुझ पर ही क्यूँ फरमाया है ।। read more >>
खुददारो का खुददार आया है, खुदा जाने , अब किसके हिस्से बेशुमार प्यार आया है ।। read more >>
लडखडा कर चलना , रब तेरी रजा है, अब मै कैसे मानूं , यह मेरे हिस्से दी सजा है ।। read more >>
तपती दुपहरी और तेज धूप, छोटा सा आसियान मेरा भी है। आप के आराम के वक्त, मैं भी आई थी। तपती दुपहरी में सो रहे थे आप, मैं मुंडेर से पुकार कर read more >>
पगड़ी को भार, धरती स्यूं भी ज्यादा हुवै। कोई धरती पर रख देवै, कदी रखवाई जावै तो। देखी है जमीन धंसता... - राधेश्याम जोशी कोहिणा read more >>
चालता जद चरड़ चरड़ करती, जाणै बां'रै हाडा स्यूं होड़ करै। टाबरिया नैं बूंटिया दिरा'र खुद, चापू लगवा लेता बोदी खाल रौ। पण हिम्मत री कमी � read more >>
मां आखर सूं मुंह भर ज्यावै, मां नै देख्यां मन हरसावै। मां रौ करज उतर ना पावै, फरज आपणो बढतो जावै। मां धरणी अर मां ही जरणी, पग-पग माथै दुख read more >>
किसी को अपनी पूरी दुनिया बनाना ठीक नहीं, वो साथ तो चले, मगर मेरी ज़मीन कहीं नहीं। रिश्तों की उड़ान हो खुली हवा की तरह, एक ही पर टिकी रहे read more >>
खुदा तेरी रहमत दा नूर आया है , अब न जाने किसके हिस्से का गरुर , मेरे हाथ दी लकीरा बीच आया है ।। read more >>
किसी को अपनी पूरी दुनिया बनाना ठीक नहीं, वो साथ तो चले, मगर मेरी ज़मीन कहीं नहीं। रिश्तों की उड़ान हो खुली हवा की तरह, एक ही पर टिकी रहे read more >>
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