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निगाहों को मिल गई निगाह

मोती लाल साहु 29 May 2023 शायरी समाजिक निगाहों को मिल गई निगाह, चोटें खाई फिसल कर- तूफानों में कश्ती चलती रही- चिराग जलती रही अंदर। 9429 0 Hindi :: हिंदी

निगाहों-
को मिल गई निगाह,
चोटें खाई फिसल कर,,

तूफानों- 
में कश्ती चलती रही,
चिराग जलती रही अंदर,,

और-
निगाहों को निगाह मिल गई..!!
-मोती

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