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सुख में दीप जले जैसे दुख में बात नहीं हम कैसे रोके उसको जिसके साथ नहीं। आंगन की अंगड़ाई में दिल की इस गहराई में मत इतना गुबार भरो जिस read more >>
आत्मज्ञान कर्म- श्रेष्ठ जानो हे भाई, जिससे जीव- भवनिधि पार होता भाई,, सद्गुरु बिन जग- में आत्मज्ञान मिले न भाई, राम-कृष्ण सम- बिन गुर read more >>
उतार देखे चढ़ाव देखे जिंदगी तेरे सफर में हमने कई पड़ाव देखे कई रंग रूप में ढलते देखा हर रिश्ते को यहाँ बदलते देखा कभी रहा जिम्मेदार read more >>
चित् -चेतन सब चेतन, चित्-ए-शून्य बिन चेतन,, मन-बुद्धि-विवेक सब शून्य, बिन आत्म तत्व सब शून्य....!!!! -मोती read more >>
उस सृजनात्मक- शक्ति की ओर संकेत है, जिसके आधार- खंड-ए-ब्रह्मांड खड़ा है,, और यह जीव- जीवन परमाणु में रची-रमी है, यह सचखंड- यही से अनवरत read more >>
जिस समस्या का ना हो हल, उसके बारे में सोचना है पागलपन, ऐसी समस्या अपने सामने खुद खड़ी करता है बे अक्ल। ऐसी समस्या का भी हो सकता है हल, अग� read more >>
तुम न जाने कितने सवाल करते हो। हे जवाब सबके क्यों खुद को इतना बेताब करते हो। कहाँ से लाते हो सारे सवाल पर सारे सवाल तुम लाजवाब करते ह� read more >>
आज थोडी पी है कल ज्यादा पीयेगे हम। दर्द भले कितना भी हो आज दर्द को मात देगे हम। read more >>
खवाब है तेरे तु उनको सजालें जिन्दगी जैसी भी तु उसका मजा लें। मर्ज हे कुछ भी तु उसकी दवा लें ना हो आराम, थोडा दर्द का भी मजा लें। read more >>
एक लड़की रोज शाम को 5:30 बजे पार्क में आकर वहीं एक बेंच पर बैठ जाती और उसके ठीक 10मिनट बाद एक लड़का भी उसी के पास आकर बैठ जाता वहां से दो बेंच read more >>
मेरी यह भूल- कि मैं रहूंगा बरकरार, बरकरार जग- ना कोई जीव बरकरार,, सोचा था- सजेगी बारात दूल्हा बनूंगा, पर आख़िरत- की सजेगी ए-डोली सबकी. read more >>
"कभी क़ासिम तो कभी गजनी से भिड़ा ठाकुर ! हार तो तय थी...पर लड़ा ठाकुर ! हारना ही था उसे , वो अकेला जो लड़ा था , क्या जन्मभूमि ये तुम्हारी नही� read more >>
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