"इंसानों को बटते-
ये रंगभेद करते देखा"!
"कहते ईश्वर-अल्लाह-
भगवान् रूप कई देखा"!!
"सो भाषा बीच है-
नाम अनेक रूप कई देखा"!
"जगत धरा में रूप-
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"आत्मा सही और-
गलत की सूचना देती है"!
"परंतु मनुष्य मन के-
वज़ह भ्रमित हो जाता है"!
"इस परख की चुनौती-
को जिसने हासिल किया है"!!
"असल में उस- read more >>
मन रे बेचैन-
तू क्यों है बेगाना,
तोहे न चैन-
बसे क्यों है बेगाना,,
तू रे चंचल-
तेरा न कहीं ए-ठौर रे,
ए-मन-
भटके तीनों लोक बेचैन रे....!!!!
-मो� read more >>
तू दिखती है इतनी भोली -भाली
लगती है किसी की राजकुमारी
या हो राज दुलारी ...
रोज सवेरे आ जाती मेरे घर को,
मेरी प्यारी लाडली से मिलने
जाने क� read more >>