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मुझको नूतन संसार चाहिए मुझे चाहिए ऐसा बंधन जिसका काल नहीं कोई मुकुट धरों का मुकुट चाहिए मान और सम्मान चाहिए अधिकारों की बात करें तो read more >>
...शब्द भेद का गुर जो- लखे सहजे भवसागर तर जाए... ...सांस चक्कर में जीवन- घुरत फ़िरे एक आवे एक जाए... ...देह-धाम,मन-मंदिर में- रमता-राम सुरति चढ़ read more >>
मैं जब भी उससे बोलती थी मुझे धोखा कभी मत देना वो हमेशा मुझसे कहता था धोखा कैसा, किसे कहते हैं धोखा उस वक़्त मैं समझ ना पाई उसके कहने का read more >>
तुझे चाहा है तुझे चाहती रहूंगी मैं ऐसे कैसे भुला दूंगी मैं तुम मेरे नहीं हो पर मेरे ही रहोगे तुम तुम चाहे लाख दूरियां बना लो पर ए दूरी read more >>
गहरी खामोशी का समंदर एक गहरी खामोशी का समंदर हूं मैं, हां मैं हूं वही जो कल था और आज भी है और कल भी रहूंगा, तू झांक कर तो देख तेरे अंदर हूं read more >>
सांस-सांस- फिरे माला जा में चढ़ी सुरति है,, सुमिरन में- "नाम" चले ये ही ध्यान सार है..!! -मोती read more >>
किसी ने कहा- हे वजूद किसका जो हमको ऊभार दे। उसके बाद- थोडे कदम ऊपर ऊठे नही चिल्लाया नीचें उतार द� read more >>
सूरत- ये क्या चीज है, जहां सीरत टिका है,, वहां ध्यान में- "नाम है" सुमिरन ही सार है..!! -मोती read more >>
कुछ क्षणिकाएं- गम्भीर होते हुए भी मेरे सम्बन्धों का टूट जाना याद दिलाता रहा तुम्हारे अनकहे भावों को। २- घर में चोरी हुई सामान की न read more >>
ज्ञान- जहां विवेक वहां, झूठ ना बसता है वहां,, सत्य का- बोलबाला वहां, परमानंद है बसता वहां..!! -मोती read more >>
बात करने से ही प्यार हो ए जरूरी तो नहीं चुप रह कर भी हम प्यार कर सकते है ना सिर्फ सबकुछ देने से ही प्यार हो ए जरूरी तो नहीं कुछ ना देकर भ� read more >>
 हंसूं, रोऊं या चिल्लाऊं यह भाव ही मन से जाता है जब कोई साहब टी.वी. पर आता है। आँखें चमक उठती हैं मन शांति की ओर जाना शुरू होता ही है पर read more >>
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