...शब्द भेद का गुर जो-
लखे सहजे भवसागर तर जाए...
...सांस चक्कर में जीवन-
घुरत फ़िरे एक आवे एक जाए...
...देह-धाम,मन-मंदिर में-
रमता-राम सुरति चढ़ read more >>
गहरी खामोशी का समंदर
एक गहरी खामोशी का समंदर हूं मैं,
हां मैं हूं वही जो कल था और आज भी है और कल भी रहूंगा,
तू झांक कर तो देख तेरे अंदर हूं read more >>
बात करने से ही प्यार हो ए जरूरी तो नहीं
चुप रह कर भी हम प्यार कर सकते है ना
सिर्फ सबकुछ देने से ही प्यार हो ए जरूरी तो नहीं
कुछ ना देकर भ� read more >>