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प्रेम लोग एक दूसरे से करते हैं-प्रेम असल में जीवन तत्व से करते हैं
प्रेम लोग एक दूसरे से करते हैं। असल में जीवन तत्व से करते हैं।। गौर फरमाइएगा- अर्ज़ करता हूं अगला दो लाइन... जीवन जब निकल जाता है तन स�
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लोग घर के बहुत निराले हैं-सोच में ही जनाब उलझे हैं
(गज़ल) लोग घर के बहुत निराले हैं। सोच में ही जनाब उलझे हैं। रात जमते कहां हमारे हैं, चाहतें अब जवां मचले हैं। काश वे मित बने सदा दिल से
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राखी मेरी इंतजार करें-आजा भाई मेरे
कितने सुंदर, कितने प्यारे हैं ये रिश्ते मांगा जब मैंने खुदा, मिले मुझे ये फ़रिश्ते ।। मोहब्बत भर दे दिलों में, मिटा दें संकट क्लेश
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बाट दिया इस धरती को-क्या चाँद सितारो का होगा और नदियों के कुछ नाम
कि बाट दिया इस धरती को क्या चाँद सितारो का होगा और नदियों के कुछ नाम रखे बहती धारो का क्या होगा कि शिव की गंगा भी पानी है आबेजमजम भी पानी
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किसी बुनकर के चरखे की तरह चरखा विचारों का घूमता है
किसी बुनकर के चरखे की तरह, चरखा विचारों का घूमता है, बुनता रहता वो रात दिन ये मन रूपी धागा। धागा, जो धागा-धागा करके, एक पर्दा बन जाता ह�
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सपनों की दुनिया में उलझी रह जाती है
अबला नारी शक्तिहीन, अपराधीत और भयभीत, धीरे-धीरे संघर्षों में ही गुम हो जाती है। समाज की जालीम नज़रों से बच्ची, सपनों की दुनिया में उलझ�
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गहरी संध्या में उठा वीरान सा ध्वनि
विधवा की आवाज़ काली रात छाती पर आवाज़ लगी, विधवा ने निहारा और विचलित हो गई। गहरी संध्या में उठा वीरान सा ध्वनि, उसकी माटी से निकली कु�
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यह साक्षात्कार बिंदेश कुमार झा द्वारा लिया गया है जो मूल रूप से एक लेखक हैं
साक्षात्कार डॉ पीयूष गोयल यह साक्षात्कार बिंदेश कुमार झा द्वारा लिया गया है। जो मूल रूप से एक लेखक हैं। यह वर्ष 2023 में जुलाई माह में म�
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तुम बस मुस्कुराना-हजारों दीप जल जाए
हजारों दीप जल जाए तुम बस मुस्कुराना। निगाहें मेरी थम जाए तुम बस मुस्कुराना। दर्द जब भी बढ़े कि सीना चीर जाए हौसला उससे मिलने का कभी
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जब साईं का ठिकाना घट में है-तो मंज़िल भी तन में मिलेगी
नाहीं ज़िंदगी पतंग है कि कट जाएंगे। नाहीं राह अनजान है कि गुम जाएंगे।। जब साईं का ठिकाना ही हर घट में है। तो जनाब मंज़िल भी तन में ही �
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ईश्वर धरती देश जाति धर्म-सब कुछ एक है ना
"तू कहता है ईश्वर- एक है धरती एक है,,है ना"..! "तो देश-जात और धर्म- सब कुछ एक ही हुआ,,है ना"..!! -मोती
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मेरा तुम्हारा नाता क्या-इस जीवन के खेल में
"मेरा तुम्हारा नाता- क्या इस जीवन के खेल में"..! "देश-धर्म-जात-भेद- क्या इस जीवन के खेल में"..!! -मोती
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