पता नही तुम कौन हो मगर बना लिया हमे अपना
दिख रहा है हमे वो जो देखा था हमने सपना
बोलते हो ऐसा की सुनती है पूरी सभा
हम जान गए है तुम्हे सुन� read more >>
(मुक्तक छंद)
कलकल चंचल जल दिखे, बांध हुआ है भग्न।
बरसे सावन झूम के,सभी नदी जलमग्न।
मस्त सरकार सो रहे,आनन फानन काम_
सड़कों का भी लय बुरा,ज� read more >>