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सावन की फुहार-रिमझिम बरसता सावन आया
रिमझिम बरसता सावन आया। घर आंगन में खुशियां लाया। बैठा पवन देख सुमधुर मुस्कुराया। याद में प्रीतम का चेहरा मुरझया। बहती सरिता ने यौ
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तिनका तिनका-जर्रा जर्रा है रोशनी से भरा जो ख़्वाब खो गया था फिर से आ गया है
तिनका _तिनका जर्रा_जर्रा है रोशनी से भरा, जो ख़्वाब खो गया था फिर से आ गया है। दिल के अरमानों में उफान आया है, बेकरारी में अब करार आया ह�
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ख्यालों की महल-छूते हम सब जन खुशियों से आकाश
दुनिया में कभी गम न आता काश, छूते हम सब जन खुशियों से आकाश। अपने जज्बातों को कागज़ पर उकेरता हूं, चाहता हूं मेरी जज़्बात दुनिया में स�
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इंतकाल कर दिया-किसी ने किसी के सपनों का इन्तकाल कर दिया है
(मुक्तक छंद) किसी ने किसी के सपनों का इन्तकाल कर दिया है, बेरहम मासूम जज़्बातों को कुचल कर रख दिया है, क्या मजाल की जनाब एक भी अल्फाज़ स�
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मेरा प्यार निर्मल-हाल दिल का अपना सनम सुनाएं कैसे
हाल दिल का अपना सनम सुनाएं कैसे, नूर ए तन तुझ में नज़र समाएं कैसे। रात दिन तुम रहती हो पर छाई जैसे, तुम बिना अब दिल शीतल कि सम जिएं कैसे
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गुफ्तगू-गुफ्तगू तो खूब हम लोग करते हैं
(शायरी) गुफ्तगू तो खूब हम लोग करते हैं, बड़ा ही मज़ा हम सब लूटते हैं। तभी तो निष्कर्ष निकलता है, मन वांछित फ़ल पाते हैं। (स्वरचित मौलिक)
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झरनों की धारा बह रही है- पत्थरों को छू कर गुज़रती है
झरनों की धारा बह रही है, गहरी गुफाओं से निकल रही है। ऊँचाइयों से छलकती है वो, हमें आकर बहोता रही है। पत्थरों को छू कर गुज़रती है, प्रकृ
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समुद्र के लहरों की आवाज़ सुनो- जब वे खिलखिलाते हैं और छलकते हैं
समुद्र के लहरों की आवाज़ सुनो, जब वे खिलखिलाते हैं और छलकते हैं। वे आते हैं और जाते हैं, निरंतर अपनी कहानी सुनाते हैं। उठती हैं लहरें
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नदी की ओर चलो- हर एक कदम पर निर्मलता को देखो
नदी की ओर चलो हर एक कदम पर निर्मलता को देखो पानी की धार जैसे जीवन को बहाती है खुशियों का संगीत गाती है। जलती रवी की किरणों में नदी चमक�
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धर्म -हमारी समाजिक संरचना शांति और सद्भाव के लिए एक माध्यम
एक समय की बात है, एक छोटे से गांव में एक गरीब लड़का रहता था। उसके पिता एक किसान थे और वे अपने छोटे से खेत में काम करते थे। लड़का बचपन से ही
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तुम्हारा था तुमको दे दिया-तुम्हारे लिए ही सब कुछ किया
तुम्हारा था तुमको दे दिया। तुम्हारे लिए ही सब कुछ किया। तुम्हारे नैनो का ही रुप तुम्हारे मन का यह विश्वास तुम्हारा था तुमको दे दिया।
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दुख के पत्ते गिर जाएंगे-सुख के नीर भी बरसेंगे
दुख के पत्ते गिर जाएंगे सुख के नीर भी बरसेंगे जाने वह कौन घड़ी होगी दोनों एक नए होंगे। हारे मन को बांध रही हूं तुममें इनको साध रही हू�
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