गुस्ताख़ मोहब्बत ( भाग - 003)
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गांव में पंचायत बैठी हम दोनों को बुलाया गया। गांव के सारे पुरुष बच्चे हम दोनों को घेरकर ऐसे देख रहे थे , म� read more >>
गुस्ताख़ मोहब्बत ( भाग - 002 )
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वो अक्सर मेरे घर आ जाया करती थी और मैं उसके आने का बेसब्री से इंतजार करता। सबसे नजरें बचाकर मैं उसे � read more >>
तुम तो बहुत बेवफ़ा निकले ,
मेरी जिंदगी से ख़फ़ा निकले ,
तुम्हें याद करके दिन _ रात सनम____
आंसू मेरे कई दफ़ा निकले
।
शिव किशोर ,शाहजहांपुर read more >>