आज ये मौषम इतना नम क्यों है।
कहि आज फिर उसकी आँखे तो नही रोइ है।
और खुले आशमा में ये काली घटा छाई है।
लगता है आज उसे फिर मेरी याद में नीं� read more >>
तुम्हारी,
सांसों की,
सरगम ,
और मेरी
धड़कन की,
युगलबंदी से,
बनता है....
हमारे ,
जीवन में,
मधुर संगीत....
उदय सिंह कुशवाहा
ग्वालियर मध्य प्� read more >>
तुम खुश हो,
या दुखी,
मुझे नहीं मालुम,
क्योंकि
कई जमाने से,
तुम से नहीं मिला...
परन्तु मैं,
मैं हमेशा,
तुम खुश होगी,
यही मिथ्या
सोच कर,
रो� read more >>