AJAY ANAND 05 Jul 2023 कहानियाँ प्यार-महोब्बत प्रेम पुजारी, प्रेम प्रतिज्ञा, नफरत, रोमांटिक कॉमेडी रोमांस 21703 0 Hindi :: हिंदी
गुस्ताख़ मोहब्बत ( भाग - 003) ________ गांव में पंचायत बैठी हम दोनों को बुलाया गया। गांव के सारे पुरुष बच्चे हम दोनों को घेरकर ऐसे देख रहे थे , मानो हम दोनों ने बहुत बड़ा गुनाह कर दिया हो। ऐसा गुनाह जो उसका एक ही रास्ता है प्रायश्चित का। मेरे परिवार का समाज में बर्चस्व होने के कारण पंचों ने यह निर्णय लिया कि अब से दोनों आपस में कभी नहीं मिलेंगे और एक दूसरे के यहां आना-जाना नहीं होगा। अगर ऐसा कभी देखा या सुना गया तो किसी एक को गांव छोड़कर कर जाना होगा या फिर उससे भी भयानक दंड उसे दिया जाएगा। गांव की मान और मर्यादा को आज तक किसी ने भी धूमिल करने की कोशिश नहीं की है। दो दिलों को कैद कर आज तक किसने रखा है। जब लैला मजनू को कोई कैद नहीं कर पाया। जमाने ने उसे भी मिलने नहीं दिया। उसने भी अपने प्यार की कुर्बानी हंसते हंसते दी। अकेलापन कब तक बर्दाश्त करते हैं । वह भी जब वह मेरी आंखों के सामने हो। और उससे मिल ना पाए। मैंने भी सोच लिया चाहें अंजाम जो भी हो हमें मिलने से कोई नहीं रोक सकता। आखिर हम दोनों ने प्यार किया है हमें साथ रहना है। मैंने यह डिसाइड किया। फिर क्या था आधी रात होते ही मैं उसके घर पहुंच जाता। प्यार के दुश्मनों ने हम दोनों की शिकायते पंचों को कह डाली । गांव वालों के सामने पंचों ने हम दोनों को खड़ा कर दिया । पंच परमेश्वर ने यह डिसाइड किया कि मुनिया को यह गांव छोड़कर जाना होगा। इसने समाज के कानून को तोड़ा है। मेरे दादा ने कहा जो पंच थे - सुहागन औरत के लिए पति ही परमेश्वर के समान होता है। इसने समाज के एक भोले-भाले युवक को अपने प्यार के झांसे में फंसा कर उसके साथ अनैतिक दुर्व्यवहार किया है। इस बदचलन औरत को इस समाज से ही नहीं इस गांव से ही निष्कासित किया जाता है ताकि अपने समाज में कोई भी औरत ऐसी गलती करने का दुस्साहस कभी ना करें। मान मर्यादा भी कोई चीज होती है उसने तो सारी हदें ही पार कर दी। दादाजी क्रोधित होकर गुस्से से बोले जा रहे थे । मुनिया भाभी चुपचाप मुंह लटकाए पंचों के सारी बातों को सुनती जा रही थी। वह कह भी क्या सकती थी एक लाचार औरत की बातों को सुनने वाला वहां पर था ही कौन ? मुनिया के पिता ने भी कह दिया मुझे इससे कोई मतलब नहीं है, मैं इसे नहीं रखुंगा।इसे जहां जाना है चली जाए।इसके कारण मैं अपने गांव में मुंह दिखाने लायक नहीं रहा। आज से यह मेरे लिए मर चुकी है। मेरे दादा भी उन पंचों में से एक थे इसलिए मुझे गांव छोड़कर जाने को नहीं कहा गया। गांव के पुरुष और औरतें जो पंच और हम लोगों को चारों तरफ से घेर कर तमाशा देख रहे थे उसमें से कुछ युवक मुनिया भाभी को गिद्ध की नजर से देखे जा रहा था। जैसे लग रहा हो आज इसे नोच नोच कर सब खा ही जाएगा। अगल-बगल खड़ी औरत भी अपने में कानाफूसी कर रही थी देखन में कितनी शरीफ लगत है और चाल चलन तो देखो, कितने गंदे। बेहाया औरत कहीं की। प्रेम लीला करत वक्त शरम ना आई तुझको का। ऐसी गिरी हुई हरकत की । तुझे तो भगवान भी ना माफ करें। मैं देख रहा था पंचों ने एक का ही पक्ष लेकर फैसले को सुना रहा था । मैंने हाथ जोड़कर पंचों से कहा- मुनिया भाभी गांव छोड़कर क्यों जाएगी , मैं जाऊंगा गांव छोड़कर। मेरे दादा जी तैयार नहीं हो रहे थे। उसने कहा गांव और घर की मान मर्यादा एक औरत पर निर्भर करती है। उस चरित्रहीन औरत ने गांव के मिट्टी को अपवित्र किया है, उसे ही गांव और समाज को छोड़कर जाना होगा। दादा जी मेरे पक्ष में थे, लेकिन मैं भी मानने वालों में से कहां था। मैंने भी अपना फैसला पंचों को सुना दिया- मुनिया भाभी की कोई गलती नहीं है इसने मुझे अपने से मिलने से हमेशा मना किया - मुनिया भाभी की ओर देखकर मैं बोल रहा था। मैं ही था जो इसके रोकने पर भी इसके यहां जाता रहा यह तो मेरे यहां नहीं आई, जो इसकी गलती है। गलती मेरी है प्रायश्चित मुझे ही करना है जो भी सजा पंचों द्वारा दी जाएगी मुझे मंजूर है। , मैं एक ही सांस में बिना कोई झिझक के बोलता चला गया। प्यार किया तो डरना क्या ???????? आखिर कार पंचों ने मेरे जिद के आगे अपनी हार मान ही ली और ....... क्रमशः ........???