आज हवा का झोंका मदहोश है,
आ गले लग जा ऐ मेरी जिन्दगी।
आज न करना कोई बहाना ,
बरसात की बौछार बन मुझ पे बरस जा।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार स� read more >>
प्रेम का बीज जैसे दबाया उधर
उनको दुख का समीकरण समझ आ गया।
नेह बन्धन बने, साथ चन्दन बने
मेरे सपने पर दुनिया का मन आ गया।
बात हम भी किये, ब� read more >>
बरसात की एक रात मेरे दिल में अंकित है,
और शायद जीवन भर भी अंकित ही रहे।
अमावस्या की काली रात और खूब बारिश,
आधी रात से भी ज्यादा का वक्त र� read more >>