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प्यार-महोब्बत
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प्यार-महोब्बत
मुझे भी मुस्कुराना चाहिए था
आज न जाने क्यों दिल को यह ख्याल आया कुछ हुनर मुझे भी आना चाहिए! था जिंदगी के इन संघर्ष भरे पथ पर! मुझे भी मुस्कुराना चाहिए था ! जो जिंद�
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वह सांवली सी लड़की
वह साँवली सी लड़की, कभी-कभी मुझे छिपकर देखा करती थी। ना जाने क्या-क्या सोचा करती थी, कभी मुस्कुराती मुझे देखकर। कभी पलकें झुकाती मुझे द
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मिटा दू खुद को तेरी खुशियों के लिए
मिटा दू खुद को तेरी खुशियों के लिए पर तू क्या जाने, खुशी क्या होती हैं
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जो तेरे लिए बनी होगी
ध्रुव भाई कहते हैं जिसको भी तेरे आंसुओं की क़दर होगी भरोसा रख वो ख़ुद तेरे रोने से पहले ख़ुद रो देगी बेमतलब के रिस्तों के जंजाल में न�
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पत्थर भी फूल बन जाते
पत्थर भी फूल बन जाते अगर तुमने मुझपे मारे होते..!
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ये दिल जाने कौनसे दुनिया में गया
ये दिल जाने कौनसे दुनिया में गया इश्क़ के बारिश में ऐसा भीग गया तुम कौन हों, तुम क्या हों, तुम कहा से हों फिर भी तुम्हारे लिए पल में पिघ�
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अपने लक्ष्य की क़द्र होनी चाहिए
क्या आक्रषण कभी प्यार होता है आक्रषण ख़ास तौर पर युवा युग में होता है क्यों की वो उम्र ही ऐसे ही है. उन उम्र में ख़ास तौर पर लड़का और लड़की ज
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वक्त की खामोशी
वक्त की खामोशी ने हमें गूंगा बना दिया वरना हम भी बहुत कमाल के शायर थे
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तस्वीर बन जाएगी- मेरे दिल का नक्शा
तस्वीर बना के देख ले, जरा सी मेरे दिल की तु भी जब कागज पे उकरेगा मेरे दिल का नक्शा तेरी तस्वीर खुद बन जाएगी ।
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प्रेमचंद अपना-बना दिया है प्रेमचंद अपना
रहती है वह एक गांव में, रहती है वह एक गांव में, रहता है वह भी एक गांव में। घर के पास जाते हैं हम, घर के पास जाते हैं हम, उसे देख नहीं पाते ह
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तुम पूरे बदल चुके हो- तुम आजकल खुद की समझ से बाहर हो
तुम पुरे बदल चुके हो….. उससे मिलकर न तुम चुके बदल गए हो सायद ये तुम्हे भी महसूस नहीं की ये क्या होगा हर वक्त वही सकस रहता होगा ध्यान में
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सहमी धरा-वीरान सी जगह जैसे थार मरुस्थल
यह वीरान सी जगह, जैसे थार मरुस्थल।यह बिखरी ठंडी रात, जैसे थार मरुस्थल की रात ।। यह दक्षिण सड़क पर पहुंचकर रुक सा गया ।यह सड़क को देखा तो
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