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प्यार-महोब्बत
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प्यार-महोब्बत
Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
जो लोग लेबाश देख कर दूसरे की पहचान करते है उनकी खुद की पहचान कुत्ते के जैसी होती है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
जिसे नमाज पढ़ना बोरिंग लग रही है कल बही लोग मरने के बाद अपने जिंदा होने पर नमाज पढ़ने के लिए दर बदर की ठोकरें खाते फिरेंगे।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
कायरों की मर्दानगी है नौजवानो की एक औरत को तीन तलाक के बंधन में बांध कर उसकी ही जिंदगी पर पैबंद लगा रखी है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
किस लिए मोहब्बत करूं यहां जब मेरा खुद का ही वजूद सिर्फ मिट्टी है।और मिट्टी से बनी हुई हर चीजों से कभी वफा नही मिलती है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
लोग सिर्फ आइने में ही अपनी अच्छाई देखते है।लेकिन अपने अंदर कोई नही झांकता है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
लोग भरोसा नहीं तोड़ते है बल्कि हमे एक नसीहत दे कर छोड़ देते है।अगर तुम से नहीं होगा तो किसी और से होने की उम्मीद भी मत करो।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सब को जरूरत से ही मोहब्बत है हम तो बस एक लेबाश है जो अपने जरूरत को पूरी करने के लिए लोग कपड़े के तरह इस्तेमाल करते है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
हर एक चीज खोने के बाद ही उसकी अहमियत मालूम पड़ती है।क्योंकि अक्सर हीरा कोयले में ही मिलती है जिसे लोगों को पसंद नहीं।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
जिन की खुद की जिंदगी ही मुकम्मल नही है। वो मोहब्बत मुकम्मल करना चाहते हैं।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
पढ़ाई भले ही हमने छोड़ दी है।क्योंकि अब किताबों से ज्यादा तजुर्बा लोगों से ही मिल जाती है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
पढ़ाई और काम दोनो में बेज्जत होने के बाद ही हमे सिख मिलती है।कि बिना बेज्जत के ज्ञान और काम की गुण किसी को नहीं मिलती है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
जब अपने लोग ही बे दर्द है तो जमाने से क्या शिकायत करे।
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