जीवन मे मिले हो तुम मेरे, मै धन धान्य से पूर्ण हुआ।
जीवन मे मिले हो तुम मेरे, मै धन धान्य से पूर्ण हुआ।
पथ मे मेरे अब आलोकित राह का फिर आग� read more >>
कविता-मन की मनमानी
मन की मनमानी
खुद लिख जाती है
अपनी कहानी,
मन से ही जीते हम
मन से ही हारे
मन के आगे न
चलती जुबानी, मन की मनमानी-----
मन च� read more >>