(शायरी)
जंगल की वह कहानी आज भी कुछ कहती रहती है,
जहां घूमने जाने पर मंगल ही मंगल लगता था।
न कोई खौफ न कोई डर था हम सब ही संग थे,
मन में मस्त� read more >>
(शायरी)
रेल का वह सफ़र आज भी याद आ रहा है,
सामने मेरे चाँदनी जैसी एक महिला बैठी थी।
वह मुस्काई फिर शबनमी होठों से कुछ कही,
यार सफ़र में क� read more >>
(शायरी)
बहुत साल पहले की बात याद आ रही है,
अचानक एक मित्र का मिलना मज़ा आ गया।
फिर बातें हुई खुशियों के वृत में हम आ गए,
फिर वहां रंगीन मय read more >>
(शायरी)
मेरे ख्वाबों की मल्लिका अब तो आ जा,
नैना तेरी दीदार को कब से तरस रही है।
इस सुने दिल को फिर से रोशन कर दे,
उस शुभ घड़ी के लिए मैं ब� read more >>