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आहत को राहत मिली-हुई सुहानी रात सजनी रहती साथ में

संदीप कुमार सिंह 05 Aug 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी रोमांचित होंगें। 18215 0 Hindi :: हिंदी

(दोहा छंद)
आहत को राहत मिली,हुई सुहानी रात।
सजनी रहती साथ में,करती दिल की बात।।

आहत को राहत मिली,मिला भव्य अब प्यार।
जीवन में है चाँदनी,दूर हुई तकरार।।

आहत को राहत मिली,उदय हुआ अब भाग्य।
हरदम खुशियों में कटे,जैसे मिले सुराग्य।।

आहत को राहत मिली,भागा गम सब दूर।
प्यार प्यार ही अब रहे,राहों में है नूर।।

आहत को राहत मिली,दिलरूबा है संग।
रग रग में मस्ती बसी,चढ़ा खुशी के रंग।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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