(गजल छंद01)
चलते चलते बोझिल होने पर ठहराव ही है जरूरी,
रहते रहते एक ही छत के नीचे बदलाव ही है जरूरी।
संसार में गम बहुत हैं इसलिए प्यार नि� read more >>
होगी, अग्नि परीक्षा,
जीवन-पथ ,पे तेरी -मेरी।
मे जँलूगी। बन के बाती।
तुम बन जाना ,दीपक
मेरे जीवन -साथी।
पथ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
होगी,अग्नि परीक्ष� read more >>
तुम्हें चाह कर हम कहां खो गए
बता दो हमें हम कहां खो गए।
ना जागते , न सोते हैं हम
नींदों में भी अब तो रोते हैं हम।
डराती है रातें अंधेरी सी read more >>
राह से भटका मुसाफिर सा हो गया हूं , मैं कहीं खो गया हूं
अपनो में ही गुम हो गया हूं, मैं कहीं खो गया हूं
गाड़ी का पांचवा पहिया हो गया हूं , � read more >>