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चलें जिन्दगी खेल में-सपने हों मंसूब
खेल खेल में मेल हैं, मजा गज़ब ही यार। मस्ती का आलम रहें, करें जिन्दगी प्यार।। चलें जिन्दगी खेल में,मिलें शक्ति भी खूब। स्वस्थ्य तन मन �
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बच्चे लगें सच्चे सदा-भाते सबको हृदय से
बच्चे लगें सच्चे सदा,मीठी बोली बोल। भाते सबको हृदय से, प्रीत द्वार के खोल।। बच्चे भविष्य कल बनें,होकर नव उस्ताद। बड़े बड़े वह काम कर,�
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सज धज कर राधा चली-कृष्ण मिलन की प्यास
सज धज कर राधा चली, कृष्ण मिलन की प्यास। लगती सुन्दर गजब की, उनसे ही है आस।। सज धज कर राधा चली,यमुना तरनी पास। रखी बसा मन श्याम को, मुरली �
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सरकारी सौगात-उन से मिली न मुक्ति
दीनों तक पहुंची नहीं,उनकी जो है चाह। खा जाते हैं बीच में, और दिखाए राह।। दीनों तक पहुंची नहीं, सरकारी सौगात। लोकल नेता खा गए,कहकर झूठी
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बेटी-मासुम सी जिंदगी कली सुकुमारी
मासुम सी जिंदगी कली सुकुमारी पिता के गुरूर सिया सुकुमारी चंचल सी मासुम पापा के परी माता की लाडली बहुत ही प्यारी कदम कदम पर चलना बहुत
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परमानंद जीवन का एक ही किनारा
परमानंद- जीवन का एक ही किनारा,, अगर वह नहीं है- तो ज़िंदगी भटक रही है....!! -मोती
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सिर्फ़ अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए
मैं को जो व्यक्ति- तुम्हारे में साबित करता है,, उसे रिश्तों की क़दर नहीं- सिर्फ़ अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए,, तुम्हें इस्तेमाल करता �
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यूं ना आंँखें तरेरना उसे
यूं ना आंँखें तरेरना उसे, कहीं उठ गई नज़र। तुम्हारी आ गई शामत, तू नज़र नहीं आएगा।। -मोती
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कितने मधुर थे समय के पंछी-जिनकी अब आवाज नहीं है
कितने मधुर थे समय के पंछी जिनकी अब आवाज नहीं है बिखर गये है सारे सुर अब तानों में साज नहीं है| कुछ खोया है कुछ पाया है कुछ अपने अब साथ न�
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अधिकार के लिए-हड़प वाले को जवाब देना होगा
अधिकार के लिए प्रखर होना होगा, हड़प वाले को जवाब देना होगा। अभी भी वक्त है जागो मेरे दीन, आगे बढ़ो अपनी बातों को रखिए। चुप बैठने से ह�
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कच्चे मकानों- ईमान बहुत पक्के थे
बात है 90 के दशक की कुछ बाते कुछ यादें जो आपके सामने लिखने जा रहा हूँ जो सच्ची भी हैं और अच्छी भी हैं|........................
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दीनों तक पहुंची नहीं-सुमन खुशी की आस
दीनों तक पहुंची नहीं,उनकी जो है चाह। खा जाते हैं बीच में, और दिखाए राह।। दीनों तक पहुंची नहीं, दिए हुए खैरात। लोकल नेता खा गए, करे रंगी�
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