कली को स्वतः स्वच्छंद,
ज़रा खिलने दो।
खुद को खुद से,
ज़रा मिलने दो।
जो जैसा है, वैसा,
ज़रा बनने दो।
मन को मन की,
ज़रा सुनने दो।
तोड़ो, मर� read more >>
कविता = ( कलयुग )
कथनी करनी में फ़र्क़ हुआ !
यह कलयुग का प्रभाव !!
कर्म हुए दानव जैसे !
बातों से भगवान !!
भगवा भी बदनाम हुआ !
भगवे में शैतान read more >>