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कली को स्वतः स्वच्छंद, ज़रा खिलने दो। खुद को खुद से, ज़रा मिलने दो। जो जैसा है, वैसा, ज़रा बनने दो। मन को मन की, ज़रा सुनने दो। तोड़ो, मर� read more >>
बनावटी जिन्दगी कितनी बनावटी जिन्दगी जीने लगे है हम ? झूठा रोने लगे है हम झूठा हँसने लगे है हम | एक चेहरे पर कई चेहरे लगा कर जीने लगे है ह read more >>
नमस्ते दोस्तों 🙏🙏 आयुष पिछले 1 घंटे से अपनी मम्मी को कॉल कर रहा था , पर उसकी मम्मी उसका कॉल उठा ही नहीं रही थी । तभी उसके पापा पंकज घर म� read more >>
आज संकुचन को मिटाकर चलो पथ गामी बने। है धरा निस्तेज अलौकिक रूप के स्वामी बने। हदय पर यह बोझ कितना, था ही उसका साथ कितना, मन की इस विचलि� read more >>
कविता = ( कलयुग ) कथनी करनी में फ़र्क़ हुआ ! यह कलयुग का प्रभाव !! कर्म हुए दानव जैसे ! बातों से भगवान !! भगवा भी बदनाम हुआ ! भगवे में शैतान read more >>
चूड़ियां और लडकियां चूड़ियां और लड़कियां, एक अनूठी कहानी, जैसे चंद्रमा की छाँव, बिखेरे रंगों की जवानी। चूड़ियां सजी, हाथों में खिल� read more >>
नज़र और नज़रिया नज़र और नज़रिया दो ऐसे शब्द हैं जो हमारे जीवन में गहरी संवेदनाओं और सफ़लता की नींव रखते हैं। ये शब्द व्यापार, साहित्य read more >>
हरियाली ही कुदरत थी, रिश्तों से भरी थी। यूं चले गए परिंदे सभी, यूं पेड़ सुख चले।। -मोती read more >>
महफिले सजी लोग जुटने लगे, जब आया गम तो लोग छंटने लगे, बस कुछ रह गए अपने खास मत करो झूठे लोगों पर पैसे बर्बाद। read more >>
चार की सूरत- प्यारी नहीं इस जग में, ये घोलते ज़हर जीवन में नासूर बन रहते इस तन में जीवन भर देते- असहनीय पीड़ा, नाम है इनका- काम-क्रोध-म� read more >>
एक तरन्नुम- उठ रही है दिल में मेरे आ चलेंगे कहीं दूर- इन वादियों में निर्झर, बहती तो होगी दरिया वहां गाते तो होंगे पंछी वहां आ चलेंगे read more >>
राजनीति की रोटियां, पकते हैं अब रोज। चोर_चोर सब एक हैं, करते रहते भोज।। राजनीति की रोटियां,नेता लोग के काम। बिना आधार के चले, रहे बदना� read more >>
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