*लकिरी पहेलियां*
*_कभी-कभी अनीश निकेतन की बालकनी में बैठ जाता हूं, और घंटो देखता रहता हूँ, अपने हाथों की हथेली की लकीरों को जो खिंची है। � read more >>
तू ही आरंभ है- तू ही अनंत है!
तू आदि है-
तुझ से पुरानी कोई चीज नहीं
तू नूतन है-
तुझ से नई कोई चीज नहीं
देखा ना-
अव्वल तुझसा,
तुझ से ऊंची क read more >>
पिता का पत्र समाज व पुत्रों के नाम...
शहर के एक मध्यवर्गीय बूढ़े पिता ने अपने पुत्रों के नाम एक पत्र लिखकर खुद को गोली मार ली ।
चिट्टी क्� read more >>
नारी ज्योति व ज्वाला...
दो प्रकार के नारी होती है, एक सुघड़ आदर्श नारी और फूहड़ नारी, सुघड़ नारी अपनी सहनशीलता, विवेक, धैर्य, संयम, मधुर भाषा � read more >>
संघर्ष ही जीवन
जीवन के संघर्ष में थक कर कभी ना हार...
जीवन के संघर्ष में थक कर कभी ना हार...
घिस घिस कर पत्थर से बनती लोहे की धार...
घिस घिस � read more >>