कहानी- महाप्रयाण!
रचना- जितेन्द्र शर्मा
तिथी-18/02/2023
पंडित द्वारकानाथ कई दिनों से बीमार थे। उनके बेटों ने उन्हें शहर के सबसे अच्छे डॉक्� read more >>
आए हैं हम-
इस फागुन में अपने गांव,
एक अर्से के बाद!
खुशबू जो आ रही है मदमाती-
ये मंजरिया से आम की बगिया से,
गुजर रही है ये बसंती हवा ये बया read more >>
ये याद में-
रह के गुज़र रहे हैं,
तेरे ही बाट जोहते-देखते
मेरे ये दिन और रात
नैना बरस रहे हैं ये-
नैना तरस रहे हैं।
अब तो आ जा हे मीत-
मेर� read more >>