वृद्ध आश्रम इसका नाम सुनते ही आंखों में पानी आने लगता है दिल उदास हो जाता है कुछ लम्हे दो हम सोच में पड़ जाते हैं कि जो लोग अपने माता-पित� read more >>
# अव्यक्त ...
हुआ बहुत ही धोखा ,
इसमें ऐसा ही होता ...!
कहीं-कहीं रात चांदनी ,
कहीं अंधेरा होता ...!
प्रेम ग्रंथ के पन्ने खोलूँ ,
लिख लूं अपनी � read more >>
मे अक्षय वर्मा,मैं जयपुर का रहने वाला हूं, मैं मध्यम वर्ग के परिवार से हूं ! मेरे परिवार में हम पाच लोग हैं,मैं मम्मी पापा ओर दो भाई ! हमार� read more >>
पता नहीं क्यो? मन को मन ही नहीं लग रहा है मन के बिना, मन तो लगा है मन को मनवाने में लेकिन मान ही नहीं रहा है, न जाने कौन से हाल में है, मेरा मन read more >>