पेड़ काट कर हम छाँव ढूंढ रहे हैं...
शहर में आके हम गाँव ढूंढ रहे हैं...
किसको पता था, जिंदगी ऐसी कटेगी...
डूब कर मझधार में अब नाव ढूंढ रहे हैं. read more >>
क्या मिल जाता है......???
ख़ुद को खोकर किसी और को पाने से .........??????
ख़ुद को दुःखी कर किसी और का ख़्वाब सजाने से.......
मिल जाता है सबक शायद इसी बहाने � read more >>
ये उम्र भी गुजर रही हैं,
अब तो हम किसी से कुछ कह भी नहीं सकते.......!!
मर गई हैं ख्वाहिशें सारी,
अब तो खुद को ज़िंदा कर भी नहीं सकते..,....!!!
सांसे ह read more >>
मुझे लगता है , मैं और मेरी सोच हमेशा एक जैसी नहीं रही हैं! शायद इसका कारण हमारी भावनाएं और हमारी सोच दोनों का अलग-अलग होना हैं , नहीं ऐसा भ� read more >>
ये रूठना , ये मनाना, अब रहने दो.....
तुम सही , मैं गलत.....
जो भी हैं अब रहने दो.....!!!
अब तो अच्छा है आंखों का बंजर हो जाना....
होठों पर सजी ख़ामोशी,अब read more >>
क्या हुआ दिल टूटा जो
दिल है टूटना तो था ही ..!!
आज नहीं तो कल सब बिखरना तो था ही
झूठ का आशियां
हवा के झोंको से उजड़ना तो था ही..!!
धन्यवाद🙏🏻 read more >>