लो फिर उठा दी मैंने कलम लो फिर उठा ली मैंने कलम। जैसे घर के होते काम अनेक नहीं मन करता कि उठाऊं मैं कलम। ‌‌‌‌ लेकिन हो रहा जब जुर read more >>
कितना अकेला हूँ मैं, खुद को कितना सहता हूँ मैं,
रोज मरता हूँ मैं, रोज अपने को मारता हूँ मैं,
दुनिया की इस जदोजद मैं ना रहता हूँ मैं,
अपने � read more >>