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काश
काश काश ! ये दुनिया कुछ ऐसी हो जाती इन्सानी की भी इज्जत की जाती दुर्घटना में घायल हुए लोगों से , राह चलते लोग यूं मुँ�
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. मैं प्यासा
मैं प्यासा , हूँ निराशा आँसू बन के बहे गये दिल मे थे जितने आशा सूख गये दिल की ओ सागर लूट लिया मुझे प्यार की डगर नासूर बना जख्म दिल मर के
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gareeb tha fakeer tha kalandar tha bo
गरीब था फकीर था कलन्दर था वो जो भी था दिल का सिकंदर था वो न नदी था न पोखर था न दरिया था दूर तलक़ फैला हुआ समंदर था वो कहीं भी मुकाम मुकर�
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मेरे दिल का कोरा पन्ना अधूरा रह गया
मेरे दिल का पन्ना कोरा रह गया, कभी भरा नहीं रंग बेरंग रह गया, किया था सच्चा प्यार फिर भी अधूरा रह गया।
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दूरियाँ
दिल में प्यार दरमियाँ दूरियाँ रख दी ! पाक रिस्तो के बीच मजबूरियाँ रख दी !! बात समझने के लिए कुछ, भी नहीं ! जिंदगी के तजुर्बो की खाईयाँ रख
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उम्मीद
क्यों देखते हैं तुम्हारी राह जब तुम्हे पाने तक की उम्मीद नहीं
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कविता, कब मिलेगा पीडित नारी को इंसाफ।
ना मानवता का रहा मान। जहाँ इंसानियत हो शर्मशार। आये दीन होते हैं बलात्कार। कब रूकेगा ये जधंय अपराध। कब तक होगा मनिषा निर्भया कांड।
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Jab se tu is dil se dur ho gya
Jab se tu is dil se dur ho gya ,dil mera chaknachoor ho gya,bikhr gye sare sapne, jinda rahna muskil ho gya.
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Tere gum mai hum pagal ho gye
Tere gum mai hum pagal ho gye,koi khabr na rahti h apni ,khud se itne begane ho gye.
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दौर
गुज़रते हरेक ज़माने से गुजरा हूँ मैं कभी हौसलों में ज़ोर था यादें आती हैं मीठी मीठी सी वो वक़्त नहीं बिखरता दौर था नफ़रतों में पलते अज़ीज़
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दर्द भरी शायरी, उसकी याद मे
कौन कहता है कि हम एक ही मरते है। अपने को खोकर . देखो हम कितना तड़पते है ॥ विरह की अग्नि मे जलते हैं और आहे भरते है । खामोश हर दर्द को सह क�
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उधड़े धागे
वो उधड़े धागे उन रिश्तों के है जहाँ गांठो की गुंजाइश कम है ज़िन्दगी के दरिये का गोताखोर हु यहाँ बचे रहने की फरमाइश कम है हर तरफ सिर्�
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