खामोशी में भी जो गुढ़ बात कह जाए,
वो अश्क आंँखों से मोती बन बह जाए।
रिश्तों की डोरें, सांँसों की एक सरगम,
इक पल में ही सब कुछ कितना सह जा� read more >>
1. फना के बाद
मेरा आग़ाज़ ही मुकम्मल तब होगा,
जब मेरे जिस्म से मेरी रूह फ़ना होगी...
ना पूछ मेरी तन्हाई का सिला क्या होगा,
ना सोच कि बाद-ए-� read more >>
ग़रीबी...
लोग कहते हैं कि ये बस एक हालात है, एक वक़्त है जो बदल जाता है।
मगर क्या वाक़ई?
कभी किसी ग़रीब के दिल में झाँक कर देखो,
ये सिर्फ़ प read more >>
मौत के आने पर तकलीफ़ होना लाज़मी हैं, पर इस तकलीफ़ की वजह क्या हैं?
इन नीले शबनमी नैनों में अश्कों की वज़ह क्या है?
माना जिस्म के रूह से आ read more >>