कविता -कृष्ण बाल लीला
अब आन बसौ मोहन मन में, तेरी सूरत मन को भावत है। बचपन में तू जीवन की सबै, खूब लीला करत दिखावत है।|
ठुमकत चलत बजै पैज� read more >>
चाहे कितना दुःख हो जीवन में,
गुरु के वचनों को याद रखना,
बेहर मुश्किल से लड़ने में काम आएंगे,
जब तक प्यास ना लगे तो पानी का भी मोल ना समझ प� read more >>
गैया को चराते हो,
फिर माखन चुराते हो,
मटकी देते हो फोड़,
सब को देने वाले ,
बांटने वाले मित्रों के लिए
बनते हैं चोर,
भरते हैं पेट उनका,
चल� read more >>