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Tag: Prem Shankar Jha

अब वो मेरे पास नहीं है-प्रेम शंकर झा

अब वो मेरे पास नहीं है अनजाने मे दिल जो लगाया झूठा प्यार का तोहफ़ा पाया समयानुसार समझ ना आया अब नजरें उनको तालाश रही

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आया दशहरा या आया था काल-प्रेम शंकर झा

दशहरा का हो रहा था जश्न ईश्वर को ये सब अच्छा ना लगा मिनटों में बहे सैकड़ों के अश्क पल भर में फैला मौत का

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शिक्षा का व्यवसायीकरण -प्रेम शंकर झा

व्यवस्था शून्य , गुरु दक्षिणा हजारों में अनमोल शिक्षा का विक्रय होता दुनिया बाजारों में शिक्षक लूट रहे मन चाहे जब मौन है सरकारी मन

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जिसको मैं अपना समझा -प्रेम शंकर झा

जिसको मैं अपना समझा ,वही असल पराये निकले जिसको समझता महामूर्ख,मै वही मेरा महा गुरु निकले जिसको मैं अंधेरा समझा, वही मेरा असली गलियारे निकाले

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आ रहा है रक्षाबंधन -प्रेम शंकर झा

आ रहा है रक्षाबंधन बंधेगी राखी ,लगेगा चंदन होगा अग्रजों का अभिनंदन आ रहा है रक्षाबंधन ! सूना करके घर आँगन जो हाथ पहनेगी कंगन

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कितना सुन्दर मेरा गाँव- प्रेम शंकर झा

कितना सुन्दर मेरा गाँव खुशियां यहाँ बसती है सदा अभी भी है पीपल की छांव कितना सुन्दर मेरा गाँव ! कितने सुन्दर लोग यहां के

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आ रहा है रक्षाबंधन -प्रेम शंकर झा

आ रहा है रक्षाबंधन बंधेगी राखी ,लगेगा चंदन होगा अग्रजों का अभिनंदन आ रहा है रक्षाबंधन ! सूना करके घर आँगन जो हाथ पहनेगी कंगन

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एक समाज ऐसा भी-प्रेम शंकर झा

दुःख,आक्रोश,कष्ट,समस्या,ख़ुशी रोक ,लगाव , जुड़ाव,और दुस्मनी सबको मिलाकर तैयार करते पोटली किसी को सरताज बनाता या मोहताज और हम प्यार से नाम देते समाज कभी

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शिक्षक का होता अरमान-प्रेम शंकर झा

गुरु वही जो जीवन में नव-राह,गति,नव-जीवन दें मेरा बनाए नव तस्वीर मेरा बनाए नव तकदीर गुरु परिभाषा वह नहीं कि उत्तीर्णता दें किताबी परीक्षा में

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क्यों दिल तोरी, मुझे ही छोरी – जब प्रेममय दुनिया सारी है – प्रेम शंकर झा

मेरी जिसको परवाह नहीं , हमको तो परवाह उसी का है | यहां बातें मेरे गम का नहीं , पर बात उसकी खुशी का है|

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