Meena ahirwar 03 Apr 2025 आलेख समाजिक एक सामाजिक मुद्दा, भावी पीढ़ी को सही रहा पर लाने की एक छोटी पहल 22436 0 Hindi :: हिंदी
आज का युग सच में आधुनिक होता जा रहा है, सभ्यता, संस्कृति जैसे खत्म होती जा रही, अब तो रिश्तों का भी अस्तित्व खतरे में आ गया है, हर तरफ़ डर का माहोल देखने को मिल रहा, कल तक एक औरत को प्रताड़ित किया जाता था ,आज एक पुरुष को. अजीव बात है की पुरुष प्रधान समाज में उल्टी गंगा कैसे बहने लगी हजारों केस जहाँ लड़कियों ,महिलाओ से भरे पड़े थे, उनमें पुरुष भी सामिल होंगे कभी कल्पना नहीं की थी, लेकिन अपराध तो अपराध ही होता है, फ़िर चाहें वो पुरुष के खिलाफ़ हो या महिला के खिलाफ़ हो .आख़िर ये केस दिन- प्रति -दिन क्यों बढ़ रहे , क्या आप में से किसी ने सोचा, नहीं .अपराध क्यों इतनी तेजी से बढ़ रहे है इसका एक विशेष कारण यह है की आज कल के माता- पिता आपने बच्चों में संस्कार देने के बजाये, उन्हें मोबाइल दे देते है, ताकि बच्चे उन्हें परेशान ना करें, और यदि बच्चे गलती करे तो उन्हें रोकने की जगह उन्हें बढ़ावा दिया जाता है, क्युकी माता- पिता का मानना होता है .बच्चे गलतियों से ही सीखते है, माता- पिता का मानना सही है , बच्चे गलतियों से ही सीखते है, लेकिन गलतियां ऐसी भी नहीं होने चाहिये जो आगे चलकर अपराध का रूप ले -ले, बच्चे यदि झूठ बोले, चोरी करे, या आपकी बात ना माने तो उन्हें उसी समय प्यार से समझना चाहिये, यदि हम बच्चे का बचपन जितना अच्छा बनायेगे आगे चलकर वो एक महान व्यक्ति के रूप में उभरकर सामने आयेगा, इसी लिये बच्चों में अच्छे संस्कार डालो, क्युकी संस्कार ही व्यक्ति को अच्छा और बुरा बनता है, यदि संस्कार अच्छे है तो अपराध जन्म ही नहीं लेगा.. अपराध का दूसरा कारण बुरी संगीति का होना, बच्चे हो या बड़े दोनों पर इसका प्रभाव देखने को मिलता है, इसलिये माता- पिता का दायित्व होता है की बच्चों या बड़ों के अंदर अच्छे या बुरे की पहचान विकसित करे, ताकि वो कभी किसी मोड़ पर ग़लत रास्ते पर ना जा सके, उनमें अच्छे बुरे की समझ होने चाहिये, ऐसा करने से अपराध को रोका जा सकता है, नाम- मीना- अहिरवार, जिला - छतरपुर (म.प्र)