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हाँ, मैं हिन्दी हूँ

नागमणि कुमार सिंह 03 Sep 2026 कविताएँ देश-प्रेम हाँ, मैं हिन्दी हूँ 192 0 Hindi :: हिंदी

शीर्षक: हाँ, मैं हिन्दी हूँ

भारत मां का स्वाभिमान हूँ, 
संस्कृति की पहचान हूँ, 
घर-घर की आवाज़ हूँ, 
हाँ, मैं हिन्दी हूँ। 

परियों की कहानी हूँ, 
बच्चों की नानी हूँ, 
लोकगीत की रानी हूँ, 
हाँ, मैं हिन्दी हूँ।

इतिहास की धरोहर हूँ, 
वर्तमान की जरूरत हूँ, 
भविष्य की उम्मीद हूँ, 
हाँ, मैं हिन्दी हूँ। 

बाजार की भाषा हूँ, 
शासन की परिभाषा हूँ, 
संगीत की अभिलाषा हूँ, 
हाँ, मैं हिन्दी हूँ। 

खेत खलिहानों की सुगंध हूँ, 
सीमाओं से परे आजाद हूँ, 
शिक्षा क्षेत्र का स्तम्भ हूँ, 
हाँ, मैं हिन्दी हूँ। 

गंगा जल सा शुध्द हूँ, 
सत्य हरिचन्द सा सत्य हूँ, 
मधु का मधुर हूँ, 
हाँ, मैं हिन्दी हूँ। 

देश की राजभाषा हूँ, 
राष्ट्रभाषा बनने की आशा हूँ, 
कार्यालयों की दिशा हूँ, 
हाँ, मैं हिन्दी हूँ। 

विश्व गुरू बनने का माध्यम हूँ, 
एकता का सूत्र हूँ, 
भाई चारा का मिसाल हूँ, 
हाँ, मैं हिन्दी हूँ। 

विकसित भारत का आधार हूँ, 
विज्ञान का प्रचार हूँ, 
सोशल मीडिया पर छाया हूँ, 
हैं, मैं हिन्दी हूँ। 

मैं सर्वत्र हूँ, 
मैं सशक्त हूँ, 
मैं सजग हूँ, 
हाँ मैं हिन्दी हूँ। 

लेखक- नागमणि कुमार सिंह

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