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” सुनहरा पत्र “-अतुल कुशवाहा

सेवा में , बुधवार – 23/09/2020
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की होनहार एव प्रतिभावान छात्रा सुप्रिया जी
विषय = सुगन्धित गुलाबी चिकने कागज पर एक अनोखा पत्र जो प्रियतमा को अपना सुन्दर स्वछंद व् मनोहा छवि दिखाने हेतु |
मेरी प्रिये आप क्यों हमारे इस कोमल व् नन्हे हिर्दय को छलनी करने पर तुली हुयी है |मै जब से आपका massage पढ़ा हु तब से रातो की नीद और दिन का चैन ही छीन गया है | आप कब तक हमारे इस प्यारे व् नन्हे हिर्दय से गुड्डो की भाती खेलती रहेंगी कभी तो अपने इस रूप के यौवन की सुन्दरता का प्रतिबिम्ब दिखा दीजिये |
आपकी बातो से तो हिर्दय को सुकून मिल जाता है | कमबख्त इन आँखों को कौन समझाने जाये आपके इस रूप को बिना देखे इन आँखों को यकींन ही नहीं आता |
मैसमझता हु भारतीय युवतियाँ शर्म व् हया की पुतली होती है , जब तक की वह अपने इस दिल की हलचलों से मजबूर न हो जाये |वह अपने इस रूप को हिर्दय के एक कोने में पराग की भाती छुपा कर रखती है |क्योकि वही इनका सबसे अनमोल रत्न वस्तु होती है |
लेकिन मै समझता हु रूप उसी वक्त तक राहत और खुसी देता है जब तक की उसके अन्दर एक युवती की वफ़ा की रूह हरकत कर रही होती है | वर्ना वह एक तकलीफ देने वाली वस्तु है |
इसीलिए मै कहता हु | ए रूप की रानी कृपा कर मुझे अपना इस स्वछंद और सुदर रूपी मनोहर छवि को दिखाने का कष्ट करे इसके लिए मै आपका हिर्दय से कृतज्ञ रहूँगा | क्योकि आपके इस रूप के सौन्दर्य को देखने के लिए इस अधमरे प्रेमी की आँखे पथरा गयी है | धन्यवाद
आपका अपना प्रियतम
” अतुल कुशवाहा “ (केंद्रीय विश्वविद्यालय इलाहाबाद )

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