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कुमार किशन कीर्ति
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कुमार किशन कीर्ति
कुमार किशन कीर्ति
कुमार किशन कीर्ति
@ --46
, Bihar
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तेरी यादें
आज फिर तेरी यादें आई मेरी जिंदगी मुझे ना जाने किस मोड़ पे लायी। जिसे भुला दिया था, जिसे इस दिल से निकाल दिया था। आज फिर... तन्हाई में उसक�
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हिंदी
आओ हम हिंदी का सम्मान करें हम भारतवासी की यह मातृभाषा है। क्यो ना इसका सम्मान करें? हिंदी है भारत की बिंदी इससे है राष्ट्र का सम्मान।
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बचपन
कहाँ गया मेरा बचपन आज भी उसे मैं खोजता हूँ। बस,उसे याद करके मायूस हो जाता हूँ। कितना खुश था,जब बचपन मे था। आज जब युवा अवस्था हूँ तब जि�
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सफलता
हम सभी सफल होना चाहते हैं, मगर कितने लोग सफल हो जाते हैं?सफलता और असफलता के लिए मनुष्य भाग्य को कोसता है।मगर,मेरा मानना है की लक्ष्य को �
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बूढ़ा वृक्ष....
कई वर्षों से देखा चला आ रहा हूँ उस पुराने बूढ़े वृक्ष को। कभी उस पर भी हरियाली थी। बैठे रहते थे उस पर बंदरों का समूह, गाते थे उसपर पंछियो
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मातृदिवस
मातृदिवस था।चारों तरफ युवावर्ग अपनी मां को शुभकामनाएं और उपहार दे रहे थे।कोई अपनी माँ के साथ सेल्फी भी ले रहे थे।बस,चारों तरफ धूम मची
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पिता
पिता मान है, पिता सम्मान है। पिता ही मेरे अभिमान है। मैं जिनकी पूजा करूँ वह पिता देवतुल्य समान है। पिता धर्म है, पिता ज्ञान है। जिनकी
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कर्म और भाग्य
आज भी मनुष्य भाग्य और कर्म की जंजाल में जकड़ा हुआ है।नतीजा...वह बहस करता है।एक दूसरे को नीचा दिखाता है।किंतु,मेरे विचार से भाग्य और कर्म
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हिंदी बोलने में शर्म कैसा?
आजकल इंग्लिश बोलने का प्रचलन बहुत ज्यादा ही चल पड़ा है।हर इंसान चाहे वह किसी भी राज्य से हो,मगर इंग्लिश बोलना अपनी शान समझता है। मुझे इ�
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अफसर बेटा
पिता बड़े खुश थे,कारण...?उनका बेटा सरकारी अफसर है।समाज में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ गई है।बड़े-बड़े घरों से रिश्ते आने शुरू हो गए।पिता भी थोड़े बहु
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