ये शाम...
उदास है,तन्हा है।
जानती हो क्यों?
क्योंकि, तुम नहीं हो।
ये शाम....
अजीब है, उत्साहहीन है।
रंगहीन और अनुपयोगी है।
जानती हो क्यों?
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मेरी यादों से बचकर कहाँ जाओगे?
हर पल,हर लम्हा बस....
मुझे ही पाओगे?
मेरी यादों से बचकर कहाँ जाओगे?
पर,मेरी यादों के सिवा
मैं फिर भी तुम्हा� read more >>