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कुमार किशन कीर्ति
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कुमार किशन कीर्ति
कुमार किशन कीर्ति
कुमार किशन कीर्ति
@ --46
, Bihar
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हँसते ज़ख्म-जीवन में मुझे कुछ नहीं मिला
जीवन में मुझे कुछ नहीं मिला, मिला भी तो हँसते ज़ख्म....। हँसते ज़ख्म? जी हाँ। मेरा दिल टूटा है जरूर मगर, खुश है। तन्हा है जरूर मगर, खुश है क�
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वर्षों बाद-वर्षों बाद उसकी याद आई
वर्षों बाद उसकी याद आई, मेरी अधूरी इश्क़ मुझे किस मोड़ पर लायी। जिसे दिल से भुला दिया था, ना जाने क्यों लबों पे उसकी नाम आई। जिससे इश्क़ हु
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काश तुम समझ पाती-सच्ची मोहब्बत
काश!तुम समझ पाती! मुझे यूँ छोड़कर नहीं जाती। कितना अच्छा होता, जब हम-तुम एक होते। तब,अधूरे इश्क़ मुकम्मल होते। काश!तुम समझ पाती! मुझे यू�
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खामोश लब-सिर्फ तुम्हारी चाहत में
तुम्हारी खामोश लब, ना जाने मुझसे क्या कहना चाहते हैं? कोई तो ऐसी बात है,जो तुम्हारी लबों पे आकर रुक जाती है। कभी-कभी मुझे ऐसा लगता है, य�
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चाहा तो बहुत-उसकी चाहत में इस कदर खोए हुए है
उसकी चाहत में इस कदर खोए हुए है, वह है शमां तो हम परवाने बने हुए है। इक तरफा मोहब्बत में ना-जाने कब तलक दर्द सहेंगे।कोई तारीख बता दो,हम �
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तेरी चाहत में- हर जख्म का दर्द सह लेंगे
उसकी चाहत में मुक्कमल जहां भुलाए बैठे है,सागर है पास में फिर भी प्यासे बैठे हैं। तेरी चाहत में हर जख्म का दर्द सह लेंगे, मकां है कच्ची,�
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बचपन-वह बचपन ही ठीक था
कभी-कभी मेरा दिल, मुझसे यह कहता है। क्यों मैं युवा हो गया, यह प्रश्न मन में उठता है। वह बचपन ही ठीक था, वह बचपना ही बेहतरीन था। जिंदगी क
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लालची खरगोश।
बहुत पुरानी बात है।रामपुर गांव की सीमा पर एक बुढ़िया अपनी छोटी सी मड़ैया में रहती थी।बेचारी का कोई नहीं था।भीख मांगकर खाती और कभी-कभी गा
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तुम्हें भूल ना सका-जीवन में बहुत कुछ खोया
जीवन में बहुत कुछ खोया, पर तुम्हें खोकर भी तुम्हें भूल ना सका। जब कभी सागर किनारे मैं टहलता हूँ, तब ढ़लते सूरज को देखकर तुम्हें याद करता
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समय का महत्व-समय बहुत बलवान है
समय का महत्व बहुत है, इसे बच्चों तुम ना व्यर्थ गवाना। अगर समय पीछे छूट गया तो ना-मुमकिन है फिर इसे पाना। जिसने भी समय का महत्व समझा, सम
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