तेरा ही रूप-
देखता हूं जग में,
कण-ए-कण में-
तू है समाया जग में,
आता-जाता ना-
जन्म लेता तू अविनाशी रे....
दिल में-
रहे तू कृष्ण कन्हैया रे. read more >>
तू गुज़रे हुए लम्हों की सौग़ात है,
तू मेरी वह तस्वीर-ए-सौग़ात है,
चहकता तू महकता रहे दुनिया-ए-चमन में...
अद्विक-ए-तू सूरज सा चमकता रहे...
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