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मोती लाल साहु
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मोती लाल साहु
मोती लाल साहु
मोती लाल साहु
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भूल भुलैया जगत एक सपना
मुसाफ़िर हूं यारों भटक रहा मैं, जीवन की राह में भटक रहा मैं, ओर ना ठौर कहीं माया का संसार है... भूल-भुलैया जगत-ए-सपना है... -मोती
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हृदय में तू अनहद तूर बजा दे
हनुमान हूं ना अर्जुन मैं कैसे, मिले तू हरि तो पहचानू कैसे, हे मेरे मालिक दिव्य ज्ञान तू दे दे... मेरे हृदय अनहद तूर बजा दे... -मोती
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राही तू पाए ना ठौर बिना सद्गुरु रे
राही तू पाए ना ठौर बिना सद्गुरु रे सत् का संगत ना होई बिना सद्गुरु रे महल अटारी दौलत सगे काम आवे ना कोई रे बिना सद्गुरु-ए-भवपार नाही को
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नज़रिया
नज़र दिया दुनिया ने देखा रंग अनेक। नज़र मेरे सतगुरु का सबमें रंग एक।। नज़र दिया दुनिया ने देखा देश-विदेश। नज़र मेरे सतगुरु का जग है �
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सद्गुरु की लीला
मेरे सद्गुरु ऐसे दुनिया चले जैसे, रूप धरा मानुष का दुनिया जाने कैसे, भक्तों ने जाना कैसे वो हनुमान ने जैसे... लीला कैसा कलयुग में जैसा �
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गुरु मेरा सोना-सोना
गुरु मेरा सोना-सोना, बात कहें वो खरा-सोना, सुन जन्म-मरण कट जायेगा... भवसागर तैर जायेगा... -मोती
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सनम
मेरे हसरत में तू रहती सनम तेरे खातिर मैं जिंदा हूं सनम -मोती
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सनम-1
मेरे ख्वाबों की मलिका तू है सनम मेरे दिल चैन दिल आराम तू सनम -मोती
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एक झलक को मरता हूं
मेरी चाहत क्या- ख्वाहिश पूछो न मेरी जान मरता जिस सूरत- पर क्यों पूछो न मेरी जान क्या समझाऊं- नज़र दुनिया की प्रेम दाग़दार है मूर्त�
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कैसे मिलूंगा मैं तुझसे हे राम
कैसे मिलूंगा मैं तुझसे हे राम कैसे लोग मिलते हैं तुझे हे घनश्याम कैसे मंदिर-मस्जिद-र्चच कहते दरबार है तेरा तुम-ए-ख़ुदा दिखता नहीं मै�
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