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मोती लाल साहु
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मोती लाल साहु
मोती लाल साहु
मोती लाल साहु
@ --7
, Jharkhand
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घाट-घाट का पानी पिया हूं-खामोशी में मौज करता हूं
"घाट-घाट का पानी पिया हूं, खामोशी में मौज करता हूं",,, "अब कुछ बाकी नहीं है, मंज़िले सफ़र बुलंद है"....!!!! -मोती
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यह दिल दरबार उसका-रचा रब ने
"यह जो चेहरा दिए- कई-कई रूप रब ने" "चेहरा ख़ुद का- छुपाया दिल तेरे रब ने" "तू खोजता फिरता- रब को कई-कई दर में" "यह दिल- दरबार उसका रचा रब न�
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कैसे करूं उस रब की तारीफ-जिससे जुड़ा मेरा अक्शे- कमल
कैसे करूं उस रब की तारीफ़। जीवन का स्रोत उसकी तारीफ़।। जिससे जुड़ा मेरा अक्शे-कमल। नूर मेरा वह रूह की तारीफ़।। -मोती
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प्रेम लोग एक दूसरे से करते हैं-प्रेम असल में जीवन तत्व से करते हैं
प्रेम लोग एक दूसरे से करते हैं। असल में जीवन तत्व से करते हैं।। गौर फरमाइएगा- अर्ज़ करता हूं अगला दो लाइन... जीवन जब निकल जाता है तन स�
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भगवन् तेरा यह खेल निराला-तू है निराला तेरा संसार निराला
भगवन् तेरा यह खेल निराला। तू है निराला तेरा संसार निराला।। तू जर्रे-जर्रे में हर शक्स के सीने में। आता सांसों में घट-घट में तू निराला
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जब साईं का ठिकाना घट में है-तो मंज़िल भी तन में मिलेगी
नाहीं ज़िंदगी पतंग है कि कट जाएंगे। नाहीं राह अनजान है कि गुम जाएंगे।। जब साईं का ठिकाना ही हर घट में है। तो जनाब मंज़िल भी तन में ही �
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ईश्वर धरती देश जाति धर्म-सब कुछ एक है ना
"तू कहता है ईश्वर- एक है धरती एक है,,है ना"..! "तो देश-जात और धर्म- सब कुछ एक ही हुआ,,है ना"..!! -मोती
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मेरा तुम्हारा नाता क्या-इस जीवन के खेल में
"मेरा तुम्हारा नाता- क्या इस जीवन के खेल में"..! "देश-धर्म-जात-भेद- क्या इस जीवन के खेल में"..!! -मोती
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कांश मैं समझ पाता-वक्त के हाथों मेरा व़क्त था
कांश मैं- समझ पाता व़क्त को, समझा था व़क्त मेरा था,, मैं था ही बेखबर-इस, व़क्त के हाथों में मेरा व़क्त था..!! -मोती
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हीरा पाया था जिंदगी-समझ पाया न गुर
हीरा- पाया था ज़िंदगी, समझ पाया न गुर,, राह मिला- सतगुरु प्यारे, सीख पाया न गुर..!! -मोती
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