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मोती लाल साहु

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My Articles

"घाट-घाट का पानी पिया हूं, खामोशी में मौज करता हूं",,, "अब कुछ बाकी नहीं है, मंज़िले सफ़र बुलंद है"....!!!! -मोती read more >>
"यह जो चेहरा दिए- कई-कई रूप रब ने" "चेहरा ख़ुद का- छुपाया दिल तेरे रब ने" "तू खोजता फिरता- रब को कई-कई दर में" "यह दिल- दरबार उसका रचा रब न� read more >>
कैसे करूं उस रब की तारीफ़। जीवन का स्रोत उसकी तारीफ़।। जिससे जुड़ा मेरा अक्शे-कमल। नूर मेरा वह रूह की तारीफ़।। -मोती read more >>
प्रेम लोग एक दूसरे से करते हैं। असल में जीवन तत्व से करते हैं।। गौर फरमाइएगा- अर्ज़ करता हूं अगला दो लाइन... जीवन जब निकल जाता है तन स� read more >>
भगवन् तेरा यह खेल निराला। तू है निराला तेरा संसार निराला।। तू जर्रे-जर्रे में हर शक्स के सीने में। आता सांसों में घट-घट में तू निराला read more >>
नाहीं ज़िंदगी पतंग है कि कट जाएंगे। नाहीं राह अनजान है कि गुम जाएंगे।। जब साईं का ठिकाना ही हर घट में है। तो जनाब मंज़िल भी तन में ही � read more >>
"तू कहता है ईश्वर- एक है धरती एक है,,है ना"..! "तो देश-जात और धर्म- सब कुछ एक ही हुआ,,है ना"..!! -मोती read more >>
"मेरा तुम्हारा नाता- क्या इस जीवन के खेल में"..! "देश-धर्म-जात-भेद- क्या इस जीवन के खेल में"..!! -मोती read more >>
कांश मैं- समझ पाता व़क्त को, समझा था व़क्त मेरा था,, मैं था ही बेखबर-इस, व़क्त के हाथों में मेरा व़क्त था..!! -मोती read more >>
हीरा- पाया था ज़िंदगी, समझ पाया न गुर,, राह मिला- सतगुरु प्यारे, सीख पाया न गुर..!! -मोती read more >>
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