कुछ आहट लेता हूं, कुछ ख़ुशबू आती है।
यह बहकी-बहकी सी, शाम होती है।।
यह ख़्याल रखता हूं, दिल थामें रखता हूं।
तेरे घर की गलियों से, हर दिन � read more >>
कोई बनाता है कोई-
बिगड़ता है यह तो सदियों,
से चली आ रही है-परंपरा है,,
प्रकृति अपने आप-
बनती है सवंरती है और,
बिगड़ जाती है फिर बनती है,,
� read more >>
आज आप-
जिस भी चीज,
का सामना कर रहे हैं,,
बेशक आप-
हो सकता है कठिन,
परिस्थितियों से गुज़र रहे हैं,,
यक़ीनन-
इस स्थिति में भी अपनी,
आशा का द read more >>