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मोती लाल साहु
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मोती लाल साहु
मोती लाल साहु
मोती लाल साहु
@ --7
, Jharkhand
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My Articles
जब इंसान में अपनी कामयाबी पर ग़ुरूर आ जाता है
जब इंसान में- अपनी कामयाबी, पर ग़ुरुर आ जाता है.... उसे रिश्तों की- अहमियत नज़र नहीं आती,, शिष्टाचार,व्यवहार से- अभिमानी का क्या नाता,,
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वक्त सिर पर सेहरा सजाएंगे
चलते सफ़र में- काई हमसफ़र मिलेंगे,, मेहरबानियां- होगीं क़ाफिला बनेंगे,, क़बीला- भी होंगे सजेंगी बारात, वक्त सिर पर सेहरा सजाएंगे...!!!
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प्यार छुपा के रखा-दुनिया से छुपा के रखा
प्यार छुपा रखा- तुझे कैसे समझाऊं, दुनिया से छुपा के रखा.. यह चिराग़ से रौशन होगी,, रौशनी के लिए- दर्द-ए-सितम से गुज़र जाऊंगा..!! -मोती
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फ़िक्र कल में बसा संसार
गुज़रे कल- को रोते तमाम, फ़िक्र कल में बसा संसार सो बिरला जान- जो पूर्णत: आज में जीता उसके- दो दिन परमानंद में कटते -मोती
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भूख निगले जा रहा है
भूख निगले जा रहा है! आंखों से दृष्टि गई- जुबान से आवाज भी गई सब मिट गए रिश्ते-नाते,, अब मज़हब- देश-दुनिया तक याद नहीं भूख निगले जा रहा �
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सिर्फ याद है मुझे उसका ठिकाना
दिल में इस तरह से बसा है! ये दिल-ए-हाल है मेरा- भूल गया मैं अपना ठिकाना, सिर्फ याद है मुझे उसका ठिकाना दिल में इस तरह से बसा है!! -मोती
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बंद हैं ये पलकें जानूं से गुफ्तगू हो रही
मेरे कर्मों- नसीब का हाल-ए-मंजर है बंद हैं ये पलकें! जानूं से गुफ्तगू- हो रही है दिल जाग रहा है!! -मोती
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सुन-ए-भाई हम सब की यह कहानी
यह हाथ उसकी- इबादत को उठते हैं यह आंख- दर्शन को बेताब हैं ये जुबान उसके- गुणगान करते नहीं थकते यह दिल- उसी के नाम धड़कते हैं हम ईश्व�
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अजीब सी मंज़र मेरे क़रीब है
अजीब सी मंज़र मेरे क़रीब है! मिट्टी- चल रही है मिट्टी- बोल रही है मिट्टी- के रिश्ते-नाते हैं मिट्टी से- एक गड़बड़ी हो गई जिसने यह- चमत
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किसी पहाड़ की चोटी
किसी पहाड़ की चोटी- में सब कुछ त्याग कर तप गृहस्थ में- मन निर्मल रहे और, चित्त प्रसन्नता से भरी हो इस कर्म साधना- से बड़ी कोई तपस्या न�
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