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मोती लाल साहु
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मोती लाल साहु
मोती लाल साहु
मोती लाल साहु
@ --7
, Jharkhand
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एक अकेला मेरे सपनों में आता है....
एक अकेला- मेरे सपनों में आता है! एक अकेला- मुझको लुभाता है, रह-रह के याद आता है एक अदा जो- मुझको भाती है, मिलेगा कहां- मेरे सपनों में आत�
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उड़ रहे हैं ये मन पंछी....
उड़ रहे हैं ये मन पंछी, बसंती हवा के संग-संग! उड़ रहे हैं ये मन पंछी- बसंती हवा के संग-संग, खेतों में लहराती खेलती सरसों के इन फूलों से �
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याद में गुज़र रहे हैं....
ये याद में- रह के गुज़र रहे हैं, तेरे ही बाट जोहते-देखते मेरे ये दिन और रात नैना बरस रहे हैं ये- नैना तरस रहे हैं। अब तो आ जा हे मीत- मेर�
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इस जहां के हम मुसाफ़िर रुकेंगे कहां....
इस जहां के- हम हैं एक मुसाफ़िर रुकेंगे कहां, तूही है वो मंज़िल तूही है ठिकाना यहीं से तू आया यहीं को है जाना -मोती
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चले-चल हे मुसाफ़िर....
चले-चल हे मुसाफ़िर- सारे जहां ही तुम्हारा ठीकाना, माटी ने बनाया माटी में है जाना यहीं है वो मंज़िल यहीं है वो अफ़साना -मोती
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प्रेम भरा आमंत्रण जो है....
रचना है तू मन की- एक कल्पना से भरा सपना, देख रहा हूं नज़रों में प्रेम भरा आमंत्रण जो है -मोती
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प्रेम की मह़क जो आई है....
दो दिलों में बहते- प्रेम की मह़क जो आई है! आंखों में छलकते प्यार- हरेक धड़कन में धड़कते, प्रेम की जाम जो टकराई है प्रेम की मह़क जो आई ह�
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जिसको तुम खिलाते हो....
कहानी- एक काफिला इस पृथ्वी में घूम रहा था, काफिले में एक सरदार भी था। एक बच्चे के अंदर उत्सुकता जागी- सरदार से पूछा, एक व्यक्ति जो अच्छ
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प्रकाश के क़रीब जा रहा हूं....
प्रकाश के क़रीब जा रहा हूं! इस संसार से- मैं जितना दूर जा रहा हूं, उतना ही मैं- प्रकाश के क़रीब जा रहा हूं प्रकाश के क़रीब जा रहा हूं! -म
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अपार संभावनाएं....
अपार संभावनाएं! अपार संभावनाएं- भरे हैं आपके अंदर, आप शुन्य से शुरू हो सकते हैं प्रकृति का अनमोल तोहफ़ा हैं आप विजय पताका आपके नजर हा
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